मीणा जाति की महिलाएँ।

मीणा अथवा मीना मुख्यतया भारत के राजस्थानमध्य प्रदेशराज्यों में निवास करने वाली एक जनजाति है। इन्हे वैदिक युग के मत्स्य गणराज्य के मत्स्य जन-जाति का वंशज कहा जाता है, जो कि छठी शताब्दी ईसापूर्व में पल्लवित हुए।[1]

राजस्थान राज्य में सभी मीणा हिन्दू अनुसूचित जनजाति हैं,[2] परन्तु मध्य प्रदेश में मीणा (क्रम -21) विदिशा जिले कि सिरोंज तहसील में अनुसूचित जनजाति में सम्मिलित है जबकि मध्य प्रदेश के अन्य 44 जिलों में वे अन्य पिछड़ा वर्ग के अन्तर्गत आते हैं।[3] वर्तमान में भारत की केंद्र सरकार के समक्ष यह प्रस्ताव रखा गया है कि मध्य प्रदेश की समूची मीणा जाति को भारत की अनुसूचित जन जाति के रूप में मान्यता दी जाए।[4]

पुराणों के अनुसार चैत्र शुक्ला तृतीया को कृतमाला नदी के जल से मत्स्य भगवान प्रकट हुए थे। इस दिन को मीणा समाज में जहाँ एक ओर मत्स्य जयन्ती के रूप में मनाया जाता है, वहीं दूसरी ओर इसी दिन सम्पूर्ण राजस्थान में गणगौर का त्योहार बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है।[5]

मीणा/मीना संस्कृति मीना संस्कृति राजस्थान की विषेस संस्कृति है । मीना संस्कृति में मुख्य रूप से मीना जनजाति आती है। ये जनजाति मुख्य रूप से राजस्थान में निवास करती हैं। राजस्थान के इतिहास में मीना जनजाति का विषेस योगदान रहा है। किन्तु इनके लेख बहुत ही कम मिलते है। मीना जनजाति के लोगों का मुख्य कार्य खेती करना है। इनके के पास पुरखो की जमीनें है जिनपर ये खेती करते हैं। मीना संस्कृति के स्त्रियो व पुरुषों कि भेस-भूसा विशेस है यहाँ पुरुष धोत्ति-कुर्ता ओर सिर पर साफा या पगड़ी पहनते है तथा महिलाए घागरा - लुगड़ी पहनती हैं और युवा पीढ़ी सर पर सफेद तोलया बांदते है। सफेद तोलया मीनाओ की शान माना जाता है औरत जेवरों की शौखिन होती है जेवरों में मुख्य रूप से पैरो में कड़ी, पाइज्म, साठ ओर हाथों में हत्फुल, चूड़ा, वला, पूछ , बंगड़ी, कडुलया आदि पहनती है

प्रसिद्ध व्यक्ति

राजनीतिज्ञ एवं समाजसेवी
सरकारी अधिकारी
खेलकूद
कलाकार
गायक
  • राजू मीणा
  • सुरेश मीणा
  • शेर सिंह मीणा
अन्य